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पौड़ी जिले में बढ़ा अस्पतालों में प्रसव का आंकड़ा, गर्भवती महिलाओं की प्रसव के दौरान मौत के आंकड़ों में आई कमी

Feb 5, 2023
देेवप्रयाग शिव मूर्ति के पास दो स्कूटियों में भिंडत, ट्रक के नीचे आने से महिला की मौत स्कूटी से ऋषिकेष जा रहें थे दंपति देवप्रयाग। बद्रीनाथ-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग पर शिव मूर्ति के पास दो स्कूटियों की आमने-सामने की टक्कर हो गई। जिसमें एक महिला सवार की मौके पर ही मृत्यु हो गई तथा एक गंभीर रूप घायल को देवप्रयाग सीएचसी से श्रीनगर रेफर किया गया। देवप्रयाग थाना प्रभारी देवराज शर्मा ने बताया कि बदरीनाथ हाईवे पर शिवमूर्ति के पास रविवार को करीब एक बजे के करीब दो स्कूटियों की आमने समाने की भिंडत हो गईं। जिसमें ऋषिकेश के ओर जा रहें दपंति स्कूटी से गिरकर गये और महिला ट्रक के नीचे आ गये। घटना में कांति देवी(42) पत्नी वचन सिंह, हिंडोलाखाल निवासी की मौके पर मौत हो गई है। जबकि गंभीर रूप से घायल वचन सिंह(55) पुत्र चैत सिंह को स्थानीय लोगों की मदद से देवप्रयाग सीएचसी ले जाया गया जहां डॉक्टरों बेस चिकित्सालय रेफर कर दिया। कोतवाल शर्मा ने बताया कि शव को पोस्टमार्डम के लिए श्रीनगर भेजा जा रहा है और मृतक के परिजनों को सूचित कर दिया गया है। उन्होने बताया टक्कर मारकर मौके पर फरार स्कूटी सवार को ब्यासी में पकड़ लिया गया है
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पौड़ी: पहाड़ों में गर्भवती मलिाओं के सुरक्षित प्रसव को लेकर जिले का स्वास्थय महकमा जुटा हुआ है। लगातार पर्वतीय ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को जगारूक किया जा रहा है। जिसका नतीजा है कि 2019 से जनवरी 2023 तक पौड़ी जिले के विभिन्न चिकित्सालयों में 41836 संस्थागत प्रसव हुए हैं जबकि 4849 प्रसूताओं का घर पर प्रसव किया गया। आंकड़ो से साफ जाहिर है कि जिले में अब घर पर प्रसव के आंकड़ो में कमी आई है। आपको बता दें कि पहाड़ों की भौगोलिक स्थिति ऐसी नहीं है कि गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए समय पर अस्पताल पहुॅचाया जाये ऐसे में घर में ही कई बार प्रसव करा लिया जाता है। घर पर किसी विषेशज्ञ की देखरेख में प्रसव न होने से कई बार जच्चा बच्चा को खतरा भी रहता है। ऐसे में पौड़ी स्वास्थय विभाग ने गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों में प्रसव कराने की मुहिम शुरू की जो आज रंग भी ला रही है।

सीएमओ पौड़ी डा. प्रवीण कुमार ने बताया कि जिले के बेस चिकित्सालय श्रीकोट एवं उप जिला चिकित्सालय श्रीनगर में टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग आदि जिलों से भी महिलाएं प्रसव के लिए आती हैं। महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए चिकित्सा इकाई तक लाने लिए निशुल्क वाहन सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही लगातार जागरूकता अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में चलाये जा रहे हैं। लक्ष्य है कि आने वाले साल तक यह आंकड़ा और कम किया जाये।

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