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वन विभाग के कर्मचारियों को दिया जड़ी-बूटी की खेती का प्रशिक्षण

Jun 9, 2023
वन विभाग के कर्मचारियों को दिया जड़ी-बूटी की खेती का प्रशिक्षणवन विभाग के कर्मचारियों को दिया जड़ी-बूटी की खेती का प्रशिक्षण
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रूद्रप्रयाग। रूद्रप्रयाग वन प्रभाग में औषधीय एवं सगंध पादपों का परिचय, संरक्षण एवं कृषिकरण विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। प्रशिक्षण में सगंध व औषधीय पौधों की पहचान करना एवं खेती के बारे में विस्तार से वन प्रभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जानकारी दी गई। साथ ही गुरूवार को तल्यासौड़ चंद्रापुरी स्थित वन विभाग की चौकी पर तेजपत्ता, रोजमेरी, टगर, आंवला, टिमरू, हरड़, बेहड़ा, सर्पगंधा, अश्वगंधा आदि औषधीय पौधों का रोपण किया गया। इस दौरान वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को नर्सरी बनाने का प्रशिक्षण भी दिया गया। रूद्रप्रयाग वन प्रभाग, उत्तराखंड द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम का आयोजन उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (हैप्रेक), श्रीनगर के ओर से किया गया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर रूद्रप्रयाग वन प्रभाग के डीएफओं अभिमन्यू सिंह ने कहा कि वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को संगध एवं औषधीय पौधों की जानकारी होना बहुत जरूरी है। कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम वन विभाग के लिए कारगर सिद्ध होंगे। साथ ही उन्होने इस तरह के कार्यक्रमों को समय-समय पर कराएं जाने की बात कहीं। डीएफओं अभिमन्यु सिंह ने हैप्रेक द्वारा जड़ी बूटीयों के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए किए जा रहें प्रयासों की सराहाना की। कहा कि वन विभाग हैप्रेक के साथ मिलकर जड़ी-बूटियों को संरक्षित करने की दिशा में काम करेंगा। इस मौके पर कार्यक्रम संयोजिका हैप्रेक विभाग की डा. विजयलक्ष्मी त्रिवेदी ने कहा कि हिमालय क्षेत्रों में बहुतायत में पाई जाने वाली औषधीय जड़ी-बूटियां विलुप्त होती जा रही हैं। जागरूकता के अभाव में लोग औषधीय पौधे को अमूल्य औषधियों को नष्ट कर रहे हैं। कहा कि आज के समय में संगघ एवं औषधीय पौधों की मांग बढती जा रही है, मनुष्य के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ ही आर्थिक लाभ भी देते हैं। इसलिए जड़ी-बूटी उत्पादन को भरपूर बढ़ावा मिलना समाजहित में जरूरी है। डा. विजय लक्ष्मी ने कहा कि विलुप्तप्राय औषधीय पौधों के संरक्षण और संवर्द्धन को लेकर संस्थान बड़े स्तर पर कार्य कर रहा है। संस्थान की ओर से किसानों को जड़ी-बूटी कृषिकरण की तकनीकी के बारे में समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है। जिसके चलते आज पहाड़ में जड़ी-बूटी की खेती करने से किसानों की आर्थिकी को काफी मजबूती भी मिलती है। इस मौके पर हैप्रेक के शोधार्थी अभिषेक जमलोकी ने औषधीय एवं सगन्ध पादपों की जानकारी दी, डॉ. वैशाली चंदोला ने औषधीय एवं सगंधीय पौधों की प्रवर्धन विधि, डॉ. प्रदीप डोभाल ने नर्सरी तकनीकी की जानकारी दी। इस अवसर पर हैप्रेक की शोधार्थी आकांक्षा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर रेंजर यशवंत सिंह चौहान, रेंजर पूर्ण सिंह, उदय सिंह रावत, विद्या रावत, जयदेव चौहान, साईनाथ, अंजली, कुलदीप, मुकेश करासी सहित आदि मौजूद थे।
फोटो…श्रीपी….0। प्रशिक्षण कार्यशाला में वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जड़ी-बूटियों की जानकारी देते हुए।

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